बिहारी सतसई की रचना कब हुई / Bihari Satsai Ki Rachna Kab Hui?

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बिहारी सतसई की रचना कब हुई / Bihari Satsai Ki Rachna Kab Hui?

दोंस्तों! बिहारी सतसई की रचना 17वीं शताब्दी की शुरुआत में, 1600 और 1664 के बीच हुई थी. माना जाता है कि कवि बिहारी लाल चौबे ने यह रचना लिखी थी, जो हिंदी की ब्रज भाषा बोली में लगभग 700 दोहों का संग्रह है. सतसई को हिंदी साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण कृतियों में से एक माना जाता है और यह आज भी व्यापक रूप से पढ़ी और पढ़ाई जाती है.

बिहारी सतसई प्रेम, भक्ति और नैतिकता सहित विभिन्न विषयों पर कविताओं का एक संग्रह है. कविताओं की विशेषता उनकी बुद्धि, शब्दों का खेल और जटिल कल्पना है. सतसई ब्रजभाषा बोली के उपयोग के लिए भी उल्लेखनीय है, जो 17वीं शताब्दी के भारत में दरबार और अभिजात वर्ग की भाषा थी.

सतसई का कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है और यह आज भी व्यापक रूप से पढ़ी और पढ़ाई जाती है. इसे हिंदी साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण कृतियों में से एक माना जाता है और इसका हिंदी कविता और संस्कृति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है.

बिहारी का जन्म कब और कहां हुआ था / Bihari Ka Janm Kab Aur Kahan Hua Tha?

दोस्तों! महाकवि बिहारीलाल का जन्म 17 फरवरी 1595 को (कुछ स्रोतों में 1603 भी उल्लिखित है, लेकिन अधिकांशत: 1595 माना जाता है) मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के चिरघाटा गांव में हुआ था. उनका जन्म भारतीय साहित्य के इतिहास में महत्वपूर्ण घटना है, क्योंकि उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से प्रेम, भक्ति, और रस के अद्वितीय संयोजन का प्रस्तुतिकरण किया.

बिहारीलाल का बचपन वृन्दावन के आस-पास गुजरा और वहां की धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण ने उनके कविताओं को प्रभावित किया. उनका प्रिय देवता कृष्ण था और उनकी कविताओं में उनके प्रेम और भक्ति की भावना व्यक्त होती है.

उनकी प्रमुख रचनाएँ “सुखसागर”, “सतसई”, “बालकृष्ण गीतावली” और “बिहारी सतै” हैं, जिनमें वे भक्ति, प्रेम और रस के विभिन्न पहलुओं को छूने का प्रयास करते हैं. उनकी रचनाओं का मूल उद्देश्य भगवान कृष्ण के प्रति उनकी गहरी भक्ति को व्यक्त करना था, जिसने उन्हें भारतीय साहित्य के प्रमुख प्रेम कवियों में से एक बनाया.

बिहारी का समकालीन कवि कौन था / Bihari Ke Samkalin Kavi Kaun The?

दोस्तों! बिहारी के समकालीन कवि केशवदास थे. वे भी रीति काल के प्रसिद्ध कवि थे. बिहारी और केशवदास दोनों ने ही प्रेम और सौंदर्य के विषय पर रचनाएँ लिखीं. बिहारी की प्रमुख रचना सतसई है, जबकि केशवदास की प्रमुख रचनाएं रामचंद्रिका और रसिकप्रिया हैं.

बिहारी, जो 15वीं सदी के प्रसिद्ध कवी रहे है. उनका प्रमुख रचना ‘सतसई’ है. इसमें उन्होंने उपन्यासीय रूप में प्रेम और जीवन की अनगिनत पहलुओं को छूने का प्रयास किया. उनकी कविताओं में उद्धत प्रेम, प्राकृतिक सौंदर्य और मानवीय भावनाओं का प्रतिष्ठान है. बिहारी के समकालीन दूसरे महान कवि केशवदास थे.

कवि केशवदास ने भी रीति काल के काव्य की श्रेष्ठता को प्रमोट किया. उनकी प्रमुख रचनाएं ‘रामचंद्रिका’ और ‘रसिकप्रिया’ हैं, जो मुख्यत: प्रेम और भक्ति के विषयों पर आधारित हैं. उनकी कविताएं भगवान श्रीकृष्ण के अनुपम लीलाओं को आकर्षित करने में सफल रही हैं और उनकी रचनाओं में भक्ति और प्रेम की अद्वितीय भावना प्रकट होती है.

इन दोनों कवियों की रचनाएँ भारतीय साहित्य के स्वर्णिम पन्नों में गहराई से लिपटी हैं. उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से प्रेम, सौंदर्य, और आध्यात्मिकता के सुंदर आदान-प्रदान की और उनका योगदान समकालीन और आने वाली पीढ़ियों के लिए अमर बनाया.

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