पुरस्कार कहानी की मूल संवेदना क्या है?

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पुरस्कार कहानी की मूल संवेदना क्या है?

दोस्तों! पुरस्कार कहानी की मूल संवेदना प्रेम एवं मुक्त चेतना है. इस कहानी के लेखक जयशंकर प्रसाद हैं. यह कहानी नाटक के नोट्स विद्यार्थी को ध्यान में रखकर बनाया गया है. जो विद्यार्थी परीक्षा व किसी प्रतियोगिता के लिए तैयारी करते हैं उन्होंने कहानी के माध्यम से सच्चे नागरिक होने के कारण और उनको पकड़वा देती हैं, किंतु प्रेम के प्रति अपनी निष्ठा भी देखते हैं, वह भी पुरस्कार के रूप में प्राण दंड की मांग करती हैं. यही कहानी मूल संवेदना है, जिसमें कि जहां कर्तव्य एवं निष्ठा दोनों का करना बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है.

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