विद्यापति ने मुख की तुलना किससे की है / Vidyapati Ne Mukh Ki Tulna Kisse Ki Hai

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विद्यापति ने मुख की तुलना किससे की है / Vidyapati Ne Mukh Ki Tulna Kisse Ki Hai

विद्यापति ने अपनी कविता “मुख चाँद की तुला भली किन्हीं नहीं” में मुख की तुलना चाँद से की है। इस कविता में विद्यापति ने बताया है कि महिलाओं का चेहरा चाँद से भी अधिक सुंदर होता है। यह कविता उनकी सबसे प्रसिद्ध कविताओं में से एक है और इसे उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं में लोकप्रियता प्राप्त हुई है।

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